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Showing posts from February, 2019

Chanakya Niti Chapter 15 Hindi English | चाणक्य नीति पन्द्रहवां अध्याय अर्थ सहित

Chanakya Niti fifteenth 15th Chapter 15 shlokas meaning in Hindi English | चाणक्य नीति पन्द्रहवां अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित दोस्तो, आज हम चाणक्य नीति पन्द्रहवां अध्याय का हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित (chanakya niti chapter 15 in Hindi and English ) विस्तार से अध्ययन करेंगे| आशा करते हैं इससे आपके जीवन में अवश्य ही सकारात्मक परिवर्तन आएगा| Chanakya Niti Chapter 15 in Hindi and English चाणक्य नीति पन्द्रहवां अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित संस्कृत श्लोक – 1 यस्य चित्तं द्रवीभूतं कृपया सर्वजन्तुषु। तस्य ज्ञानेन मोक्षेण किं जटा भस्मलेपनैः।।1।। दोहा – 1 जासु चित्त सब जन्तु पर, आलित या रस माह। तासु ज्ञान मुक्ति जटा, भस्म लेप कर काह ।।1।। हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं जिस मनुष्य का ह्रदय सभी मनुष्य जीव जंतुओं के लिए दया भाव से भरा होता है, उसे ज्ञान, मोक्ष, जटा, भस्म लेपन आदि रखने की क्या जरुरत| यह सब दिखावा है असली संत वही है जिसका दिल अन्दर से साफ है| English Meaning:- The man whos heart filled with compassion for all, does not need any scripture knowledge, liberation...

Chanakya Niti Chapter 14 Hindi English | चाणक्य नीति चौदहवां अध्याय अर्थ सहित

Chanakya Niti Fourteenth 14th Chapter 14 shlokas meaning in Hindi English | चाणक्य नीति चौदहवां अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित दोस्तो, आज हम चाणक्य नीति चौदहवां अध्याय का हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित (chanakya niti chapter 14 in Hindi and English ) विस्तार से अध्ययन करेंगे| आशा करते हैं इससे आपके जीवन में अवश्य ही सकारात्मक परिवर्तन आएगा| Chanakya Niti Chapter 14 in Hindi and English चाणक्य नीति चौदहवां अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित संस्कृत श्लोक – 1 पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि अन्नमापः सुभाषितम्। मूढः पाषाणखंडेषु रत्नसंज्ञा विधीयते।।1।। दोहा – 1 निर्धनत्व दुःख बन्ध और विपत्ति सात ।। है खकर्म वृक्ष जात ये फलै थरेक गात ।।1।। हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं, इस प्रथ्वी पर केवल तीन ही रत्न हैं, अन्न जल और मधुर वचन, मूर्खों ने पत्थर के टुकड़ों को रत्न बना दिया है| जीवन यापन के लिए अन्न जल की ही आवश्यकता है, रत्न हीरे पन्ने आपकी भूंख और प्यास को नहीं बुझा सकते हैं और इस समाज में रहने के लिए मधुर वचनों की जरुरत है| English Meaning:- Chanakya says food, water and Melodious words are ...

Chanakya Niti Chapter 13 Hindi English | चाणक्य नीति तेरहवां अध्याय अर्थ सहित

Chanakya Niti thirteen 13th Chapter 13 shlokas meaning in Hindi English | चाणक्य नीति तेरहवां अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित दोस्तो, आज हम चाणक्य नीति गयारहवें अध्याय का हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित (chanakya niti chapter 13 in Hindi and English ) विस्तार से अध्ययन करेंगे| आशा करते हैं इससे आपके जीवन में अवश्य ही सकारात्मक परिवर्तन आएगा| Chanakya Niti Chapter 13 in Hindi and English चाणक्य नीति तेरहवां अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित संस्कृत श्लोक – 1 मुहूर्तमपि जीवेच्च नरः शुक्लेन कर्मणा। न कल्पमपि कष्टेन लोक द्वय विरोधिना।।1।। दोहा – 1 वरु नर जवै मुहूर्त भर, करिके शुचि सत्कर्म ।। नहि भरिकल्पहु लोक दुहुँ, करत विरोध अधर्म ।।१।। हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य अच्छे कर्म का जीवन में महत्व बताते हुए कहते हैं, यदि एक व्यक्ति अच्छे कर्म करता है और कुछ क्षण ही जिए तब भी उसका जीवन सार्थक माना जाएगा| लेकिन दूसरी और यदि व्यक्ति न तो स्वयं सुखी रहता है और दुसरे लोगों के सुख के विरुद्ध भी कार्य करता है ऐसा व्यक्ति न तो इस लोक और न ही परलोक में अपना जीवन सुधार पाता है ऐसा व्यक्ति अपना पूरा जीवन ...

Chanakya Niti Chapter 12 Hindi English | चाणक्य नीति बारहवां अध्याय अर्थ सहित

Chanakya Niti twelfth 12th Chapter 12 shlokas with meaning in Hindi English | चाणक्य नीति बारहवां (12th) अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित दोस्तो आज यहाँ चाणक्य नीति बारहवें अध्याय की हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित ( Chanakya Niti Chapter 12 hindi english meaning) चर्चा करेंगे| आशा करते हैं यह ज्ञान आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य लेके आएगा| Chanakya Niti Chapter 12 In Hindi and English चाणक्य निति बारहवां अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित संस्कृत श्लोक – 1 सानन्दं सदनं सुताश्च सुधयः कान्ता प्रियालापिनी, इच्छापूर्तिधनं स्वयोषिति रतिः स्वाज्ञापरः सेवकाः। आतिथ्यं शिवपूजनं प्रतिदिनं मिष्टान्नपानं गृहे, साधोः संगमुपासते च सततं धन्यो गृहस्थाश्रमः।।1।। दोहा – 1 सानन्दमंदिरपण्डित पुत्र सुबोल रहै तिरिया पुनि प्राणपियारी इच्छित सतति और वतीय रती है सेवक भौंह निहारी ।1। हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य सुखी गृहस्थ जीवन की चर्चा करते हुए कहते हैं, जिस गृहस्थ घर में समय समय पर निरंतर उत्सव यज्ञ भजन कीर्तन होते रहते हैं, संतान आज्ञाकारी और शिक्षित हों, पत्नी मधुर भाषी और मिलनसार हो, सभी सांसारिक जरू...