Posts

Showing posts from January, 2019

Chanakya Niti Chapter 5 Hindi English | चाणक्य निति पंचम अध्याय अर्थ सहित

Chanakya Niti chapter 5 shlokas with meaning in Hindi English | चाणक्य नीति पांचवां अध्याय श्लोक हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित चाणक्य भारतीय इतिहास में राजनीती और अर्थशास्त्र के अग्रदूत माने जाते हैं| इन्होने अपने जीवन के अनुभव के आधार पर और वेदों में लिखे ज्ञान के आधार पर कुछ संस्कृत श्लोकों को संग्रह किया जिसे चाणक्य निति कहा जाता है| चाणक्य नीति के 17 अध्याय में से पांचवे अध्याय (Chanakya Niti 5th Chapter in Hindi English) में भी जीवन के मूल मन्त्र संगृहीत हैं| आज हम चाणक्य निति के पंचम अध्याय की हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित ( Chanakya Niti chapter 5 shlokas with meaning in Hindi English) चर्चा करेंगे Chanakya Niti Chapter 5 with Meaning in Hindi English (1-10) चाणक्य नीति पंचम अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित संस्कृत श्लोक – 1 गुरुरग्निर्द्विजातीनां वर्णानां ब्राह्मणो गुरुः। पतिरेव गुरुः स्त्रीणां सर्वस्याभ्यगतो गुरुः।।1।। दोहा – 1 अभ्याात सबको शुरु, नारि शुरु पति जान । विजन अनि शुरु चारिहूँ, वन विप्र शुरु मान ।।१।। हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य यहां गुरु की व्याख्या-विवेचना एवं स्वरूप...

Chanakya Niti Fourth Chapter Hindi English | चाणक्य नीति चतुर्थ अध्याय

Chanakya Niti fourth 4th chapter 4 shlokas with meaning in Hindi English | चाणक्य नीति तृतीय अध्याय श्लोक हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित चाणक्य भारत के इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिज्ञ माने जाते हैं| इन्होने अपने जीवन के अनुभव के आधार पर विभिन्न शास्त्रों से संस्कृत श्लोक का संग्रह किया जिसे चाणक्य निति कहा गया| इसी ग्रन्थ का चौथा 4th अध्याय हिंदी और इंग्लिश अर्थ के साथ (chanakya niti fourth chapter with meaning in Hindi english) आपके समुख प्रस्तुत है| Chanakya Niti Chapter 4 with Meaning in Hindi English (1-10) चाणक्य नीति चतुर्थ अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित संस्कृत श्लोक – 1 आयुः कर्म वित्तञ्च विद्या निधनमेव च। पञ्चैतानि हि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः।।1।। दोहा – 1 आयुर्बल ओ कर्म, धन, विद्या अरु मरण ये । नीति कहत अस मर्म, गर्भहि में लिखि जात ये ।।1।। हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि आयु, कर्म, वित्त (धन), विद्या, निधन-ये पांचों चीजें प्राणी के भाग्य में तभी लिख दी जाती हैं, जब वह गर्भ में ही होता है। अभिप्राय यह है कि मनुष्य जब मां के गर्भ में होता है, तभी पांच चीजें उसके...

Chanakya Niti Third Chapter Hindi English | चाणक्य नीति तृतीय अध्याय

Chanakya Niti third (3rd) chapter 3 shlokas with meaning in Hindi English | चाणक्य निति तृतीय अध्याय श्लोक हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित चाणक्य भारत के इतिहास में सबसे बड़े राजनीतिज्ञ माने जाते हैं| इन्होने सिर्फ अपनी कूटनीति का प्रयोग करके एक शक्तिशाली राजा का पूरा साम्राज्य नष्ट कर दिया| चाणक्य ने हिन्दू धर्म के विभिन्न ग्रंथों से राजनीती और धर्म शास्त्र के शोल्क को एकत्रित कर एक ग्रन्थ बनाया जिसे चाणक्य नीति का नाम दिया गया| इसमें कुल 18 अध्याय हैं आज यहाँ चाणक्य निति के तृतीय अध्याय को हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित (Chanakya Niti Third Chapter shlok hindi english arth sahit) चर्चा करेंगे| Chanakya Niti Third Chapter with Meaning in Hindi and English (1 – 10) चाणक्य निति तृतीय अध्याय हिंदी और इंग्लिश अर्थ सहित संस्कृत श्लोक – 1 कस्य दोषः कुले नास्ति व्याधिना को न पीड़ितः। व्यसनं केन न प्राप्तं कस्य सौख्यं निरन्तरम्।।1।। दोहा– केहि कुल दूषण नहीं, व्याधि न काहि सताय ।। कष्ट न भोम्यो कौन जन, सुखी सदा कोउ नाय ।।१।। हिन्दी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य का कथन है कि दोष कहां नहीं है? इसी...